ये चैनल कभी शनि महाराज का खौफ दिखाकर बेखौफ अपनी दुकान चमकाते हैं, तो कभी ग्रहण के दुष्प्रभाव या कुछ और। ऐसे चैनलों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके द्वारा दिखाई गई बेतुकी खबरों से करोड़ों लोग तनाव में आ जाते हैं। नतीजा भी सामने है, उत्तर प्रदेश के कायमगंज (फर्रुखाबाद) में मंगलवार को एक बुजुर्ग टीवी पर इस काल्पनिक महाप्रलय की खबर देख रहे थे। उसी दौरान उनके पोतों ने जब उनसे इसकी चर्चा की तो उनकी सांसें ही थम गइंर्। इसी इलाके में एक कालेज छात्रा को अत्यधिक तनाव के कारण गंभीर हालत में अस्पताल में दाखिल कराया गया है। बच्चों पर इसका असर तो और भी घातक है। देश के करोड़ों बच्चे आज अनिष्ट की आशंका और दहशत के साथ स्कूल गए। यह तो बानगी भर है। पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज अस्पताल पहुंचे होंगे, जिनकी बीमारी का सही अनुमान ही नहीं लगाया जा सका होगा।
बिना किसी प्रमाणिकता के बेतुकी खबरें दिखाकर आतंक फैलाने की आजादी आखिर कब तक? ऐसे चैनलों पर यों नहीं तत्काल प्रतिबंध लगा देनी चाहिए?