Thursday, September 18, 2008

मराठियों और उत्तर भारतीयों के रिश्ते अटूट हैं

महाराष्ट्र में राज ठाकरे की गुंडागर्दी, चुपचाप उसका मुंह देखती मुंबई पुलिस और वोट बैंक के दबाव में अगल-बगल देखते राजनीतिक दलों के बीच पिस रहे हैं मेहनत कर मुंबई को आर्थिक राजधानी का खिताब दिलाने वाले उत्तर भारतीय। मराठियों और उत्तर भारतीयों का रिश्ता क्या सिर्फनफरत का है, दुश्मनी का है? इसके जवाब में प्रस्तुत है वरिष्ठ पत्रकार श्री निशीथ जोशी का एक आलेख--
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11 टिप्पणियाँ:

श्रीकांत पाराशर ने कहा…

Ranjanji, joshiji ka lekh uchh koti ka hai. unhonne sahi dhang se is mudde ko uthaya hai. samman kisi se bhi jabardasti nahin paya ja sakta.Pata nahin raj thakre ki dadagiri kab khatm hogi.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कहा हे आप ने , यह राज ठाकरे कोई नेता वेता नही एक गुण्डा हे , जो हमारी सरकार की खुदगर्जी के कारण अपनी ओकात भुल गया हे.
धन्यवाद

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

वाकई बहुत शानदार प्रस्तुति...
आंख खुल जानी चाहिये इन तथाकथित रानेताऒं की.
आपको एवं लेखक को बधाई..

रश्मि प्रभा ने कहा…

bahut sahi lekhan.....
aur saath me shukriyaa mere is naye blog par aane ke liye

सचिन मिश्रा ने कहा…

sir ji, sahi kaha aapne. aabhar

सुमित प्रताप सिंह ने कहा…

सादर नमस्ते !

कृपया निमंत्रण स्वीकारें व अपुन के ब्लॉग सुमित के तडके (गद्य) पर पधारें। "एक पत्र आतंकवादियों के नाम" आपकी टिप्पणी को प्रतीक्षारत है।

Prashant Verma ने कहा…

सर हमारे नेता आज राजनीति करने से बाज आ जाते तो हमारे देश में इस तरह की अस्थिरता कभी आती ही नहीं. इनके लिए आज बड़ी से बड़ी गाली भी छोटी है. ये भूल गये है की आज हमारा देश आज़ाद हुआ है तो उसकी सिर्फ़ और सिर्फ़ एकमात्र वजह है हमारी एकता. शहीदों ने बिना भेदभाव के, न तो जाति को देखा, न ही धर्म को देखा और न ही किसी क्षेत्र विशेष को उन्हें तो सोते-जागते, उठते-बैठते बस यही दिखाई देता था और वह थी इस देश की आजादी. अगर वो कही से हमें देख रहे होंगे तो उन्हें भी शर्म आ रही होगी कि हमने अपनी जन किनके लिए गँवा दी, जो आज़ादी के काबिल ही न थे. सर मई आपके ब्लॉग पर तांक-झांक करने आता रहूँगा. मेरे प्रश्न का उत्तर देने के लिए धन्यवाद और आशीर्वाद दीजियेगा कि मैं जैसे हूँ वैसा ही बना रहूँ.

अशोक पाण्डेय ने कहा…

अच्‍छा आलेख है। राज ठाकरे जैसे लोगों को देश में विद्वेष फैलाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

ashok priyaranjan ने कहा…

bahut achcha vishleshan hai

Vivek Gupta ने कहा…

बहुत शानदार प्रस्तुति

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

सटीक और सार्थक आलेख धन्यबाद आपका हिन्दी ब्लॉग जगत में स्वागत है ठाकरे जी के बारे में मेरे विचार जानने के लिए मेरी कविता हिन्दी पर प्रश्नवाचक ? पढ़ें
आपको मेरे ब्लॉग पर पधारने का स्नेहिल आमंत्रण है